कलौंजी के फायदे क्या है?

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आयुर्वेद में कलौंजी के बारे में कहा गया है कि “कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी” यह अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है| इसका विवरण आयुर्वेद ग्रंथो के अलावा मुस्लीमो के पवित्र ग्रंथ हदीस में भी इसका उल्लेख है कि “मौत को छोडकर हर मर्ज की दवा है कलौंजी” यही नही इसका उल्लेख सभी धर्मो के पवित्र ग्रंथो में है| कलौंजी वनस्पती पौधा है जिसके बीज भी होते है और औषधीयों के रूप में बीजों का ही प्रयोग किया जाता है|

दोस्तों आप जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर रोज़ाना नियमित रूप से सिर पर मालिश करें इससे गंजापन दूर होता है और अगर बाल झध रहे हैं तो नए बाल उग आते हैं।

कलौंजी को पीसकर सिरके में मिलाके रात को सोने से पहले अपने चेहरे पर लगाएं और सुबह ठन्डे पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपके चेहरे के मुंहासे 7 दिन में ही ठीक हो जाते हैं।

कान की सूजन में या बहरापन में कलौंजी के तेल को अच्छे से कधकधा लें और ठंडा होने के बाद कान में डालने से कान की सूजन दूर हो जाती है। और साथ ही इससे कम सुनायी देना और बहरापन जैसे रोगों में भी फायदा होता है।

10 ग्राम कलौंजी के बीज लें और इन्हे आप 3 छोटे चम्मच शहद के साथ मिला लें। ये आप रोज़ाना रात सोते समय थोड़े दिन तक नियमित रूप से इस्तेमाल करने से से पेट के कीडे़ पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं।

प्रसव पीड़ा में कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा में आराम मिलता है।

पुराने ज़ुकाम और नजले को ठीक करने के लिए आप आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व एक चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबाल लें कि पानी खत्म हो जाए। और केवल तेल ही रह जाए फिर इसके बाद आप इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें ऐसा करने से आपका पुराने से भी पुराना सर्दी-जुकाम ठीक हो जाता है।

दाद, खाज और खुजली में कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर प्रभावित त्वचा पर मालिश करने से चार्म रोगों में आराम मिलता है. और कलौंजी इसे जड़ से भी खत्म कर देती है।

आंखों में लाली हो या फिर मोतियाबिन्द, या आपकी आंखों से पानी आता हो इसके अलावा आंखों की रोशनी कम हो या कोई सा भी आंखों के रोगों में आप  कप गाजर का रस लीजिए और लगभग आधा चम्मच कलौंजी का तेल अब इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर दिन भर में कम से कम  2बार सेवन करें. इससे आपकी आंखों के सभी नेत्र सम्बन्धी रोग ठीक हो जाते हैं।

एक कप गर्म पानी लें उसमे आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक विकार व मानसिक टेंशिओं दूर होती है।

कलौंजी के बीजों को सेंक लीजिए और इनको कपड़े में लपेटकर सूंघने से  इसके अलावा कलौंजी का तेल और जैतून दोनों को बराबर मात्रा में लें और दो -दो बूँद नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है।

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